संथाली भाषा का निर्माण कहाँ हुआ था और यह भाषा कहाँ बोली जाती है? – पूरी जानकारी


भारत विविधताओं का देश है और यहाँ सैकड़ों भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। इन भाषाओं में से एक अत्यंत प्राचीन और समृद्ध भाषा है संथाली (Santhali / Santali)। संथाली भाषा भारत के आदिवासी समुदायों, विशेष रूप से संथाल (Santal) जनजाति की मातृभाषा है। यह भाषा न केवल भारत में बल्कि बांग्लादेश और नेपाल में भी बोली जाती है। 2003 में इसे भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची (Eighth Schedule) में शामिल किया गया, जिससे इसे एक आधिकारिक राष्ट्रीय भाषा का दर्जा मिल गया। इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि संथाली भाषा का निर्माण कहाँ हुआ था और यह भाषा कहाँ-कहाँ बोली जाती है।
संथाली भाषा का उद्गम और इतिहास (Origin & History)
संथाली भाषा कितनी पुरानी है?
संथाली भाषा ऑस्ट्रो-एशियाटिक (Austro-Asiatic) भाषा परिवार की मुंडा (Munda) शाखा से संबंधित है। भाषाविज्ञानियों (Linguists) का मानना है कि मुंडा भाषाएँ भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे प्राचीन भाषाओं में से हैं, जो संभवतः आर्यों और द्रविड़ों के आगमन से भी पहले यहाँ बोली जाती थीं। इसका मतलब है कि संथाली भाषा की जड़ें हज़ारों वर्ष पुरानी हैं।
संथाली भाषा का कोई एक निश्चित "निर्माण स्थल" नहीं है, क्योंकि यह किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा बनाई गई भाषा नहीं है बल्कि यह प्राकृतिक रूप से विकसित हुई है। हालांकि, भाषाविज्ञानी इसके उद्गम क्षेत्र को छोटा नागपुर पठार (Chota Nagpur Plateau) और उसके आसपास के क्षेत्रों से जोड़ते हैं। यह क्षेत्र आज के झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में फैला हुआ है।
संथाल जनजाति – भाषा के वाहक
संथाल जनजाति भारत की तीसरी सबसे बड़ी आदिवासी जनजाति है। इनकी जनसंख्या लगभग 70 लाख से 1 करोड़ के बीच अनुमानित है। संथाल लोग मुख्य रूप से कृषि, वन उपज संग्रहण और शिकार पर निर्भर रहे हैं। उनकी भाषा, संस्कृति और परंपराएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से (Oral Tradition) हस्तांतरित होती रही हैं।
ऐतिहासिक रूप से, संथाल लोग बिहार के राजमहल पहाड़ियों (Rajmahal Hills) और छोटा नागपुर पठार के घने जंगलों में निवास करते थे। 18वीं और 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासन के दौरान, कई संथाल परिवार काम की तलाश में असम, बंगाल और ओडिशा के विभिन्न हिस्सों में बस गए। यही कारण है कि आज संथाली भाषा इतने विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में बोली जाती है।
संथाल विद्रोह (1855-56) – भाषा और पहचान का संघर्ष
संथाल हूल (Santal Hul), जिसे संथाल विद्रोह भी कहा जाता है, 1855-56 में ब्रिटिश शासन, ज़मींदारों और साहूकारों के अत्याचारों के विरुद्ध हुआ था। इस विद्रोह का नेतृत्व सिद्धू और कान्हू मुर्मू ने किया था। यह विद्रोह न केवल आर्थिक शोषण के विरुद्ध था, बल्कि इसमें संथाली भाषा, संस्कृति और पहचान को बचाने की भावना भी निहित थी। आज भी यह विद्रोह संथाल समुदाय के लिए गर्व और प्रतिरोध का प्रतीक है।
ओल चिकी लिपि – संथाली भाषा की अपनी लिपि (Ol Chiki Script)

संथाली भाषा के इतिहास में सबसे क्रांतिकारी घटना थी ओल चिकी (Ol Chiki) लिपि का निर्माण। इससे पहले संथाली भाषा को लिखने के लिए कोई अपनी लिपि नहीं थी। लोग इसे लिखने के लिए देवनागरी, बंगाली, ओडिया या रोमन लिपि का उपयोग करते थे, जो संथाली भाषा की ध्वनियों को सही ढंग से प्रकट नहीं कर पाती थीं।
पंडित रघुनाथ मुर्मू – ओल चिकी के जनक
पंडित रघुनाथ मुर्मू (1905-1982) ने 1925 में ओल चिकी लिपि का आविष्कार किया। वे ओडिशा के मयूरभंज जिले के रहने वाले थे। उन्होंने महसूस किया कि संथाली भाषा की विशिष्ट ध्वनियों (जैसे ग्लोटल स्टॉप, नेज़ल साउंड्स) को व्यक्त करने के लिए एक स्वतंत्र और वैज्ञानिक लिपि की आवश्यकता है।
ओल चिकी लिपि की मुख्य विशेषताएँ:
- इसमें 30 अक्षर हैं – 6 स्वर (Vowels) और 24 व्यंजन (Consonants)।
- यह बाएँ से दाएँ (Left to Right) लिखी जाती है।
- प्रत्येक अक्षर की आकृति प्रकृति से प्रेरित है – जैसे पहाड़, नदी, पक्षी आदि।
- यह लिपि पूरी तरह से ध्वन्यात्मक (Phonetic) है, अर्थात जो बोला जाता है वही लिखा जाता है।
- 2005 में ओल चिकी को यूनिकोड (Unicode) में शामिल किया गया (Unicode Block: U+1C50 to U+1C7F)।
संथाली भाषा कहाँ-कहाँ बोली जाती है? (Where is Santhali Spoken?)

संथाली भाषा का भौगोलिक प्रसार बहुत विस्तृत है। यह मुख्य रूप से पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में बोली जाती है, लेकिन इसके बोलने वाले बांग्लादेश और नेपाल में भी पाए जाते हैं।
भारत के प्रमुख राज्य जहाँ संथाली बोली जाती है:
1. झारखंड (Jharkhand): झारखंड संथाली भाषा का मुख्य गढ़ (Heartland) है। यहाँ के संथाल परगना (Santhal Pargana) प्रमंडल – जिसमें दुमका, देवघर, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़ और जामताड़ा जिले शामिल हैं – में संथाली सबसे अधिक बोली जाती है। झारखंड सरकार ने संथाली को राज्य की आधिकारिक भाषाओं में से एक का दर्जा दिया है।
2. पश्चिम बंगाल (West Bengal): पश्चिम बंगाल में, विशेष रूप से बांकुड़ा, पुरुलिया, मेदिनीपुर, बीरभूम और मालदा जिलों में संथाली बोलने वालों की बड़ी आबादी है। राजमहल पहाड़ियों से लगे क्षेत्रों में यह प्रमुख बोलचाल की भाषा है।
3. ओडिशा (Odisha): ओडिशा के मयूरभंज, केंदुझर (Keonjhar), बालासोर और सुंदरगढ़ जिलों में बड़ी संख्या में संथाल आबादी निवास करती है। विशेष रूप से मयूरभंज जिला, जो ओल चिकी लिपि के निर्माता पंडित रघुनाथ मुर्मू की जन्मभूमि है, संथाली भाषा और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
4. बिहार (Bihar): बिहार के भागलपुर, कटिहार और बांका जिलों में संथाली बोलने वाले समुदाय पाए जाते हैं। ऐतिहासिक रूप से, बिहार का राजमहल क्षेत्र संथाल जनजाति का प्रमुख निवास स्थान रहा है।
5. असम (Assam): 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान, बड़ी संख्या में संथाल लोगों को असम के चाय बागानों में श्रमिक के रूप में लाया गया। आज भी असम के कई जिलों में संथाली बोलने वाले समुदाय रहते हैं और अपनी भाषा-संस्कृति को जीवित रखे हुए हैं।
6. त्रिपुरा (Tripura): त्रिपुरा में भी चाय बागानों और कृषि क्षेत्रों में संथाल समुदाय बसा हुआ है और वहाँ संथाली भाषा का प्रयोग होता है।
भारत के बाहर:
बांग्लादेश (Bangladesh): बांग्लादेश के राजशाही, रंगपुर और दिनाजपुर डिवीज़न में संथाल समुदाय निवास करता है। यहाँ लगभग 2-3 लाख संथाली भाषी लोग रहते हैं।
नेपाल (Nepal): नेपाल के तराई (Terai) क्षेत्र, विशेष रूप से झापा और मोरंग जिलों में संथाल समुदाय पाया जाता है।
संख्या और आँकड़े
2011 की भारतीय जनगणना के अनुसार, भारत में संथाली बोलने वालों की संख्या लगभग 73 लाख (7.3 मिलियन) है। यदि बांग्लादेश और नेपाल को भी शामिल किया जाए, तो यह संख्या 80 लाख से अधिक हो जाती है। इस प्रकार, संथाली ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा परिवार की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है।संथाली भाषा का संवैधानिक और शैक्षणिक दर्जा
आठवीं अनुसूची में शामिल (2003)
2003 में 92वें संविधान संशोधन के माध्यम से संथाली को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी क्योंकि इससे संथाली को:- सरकारी कामकाज में उपयोग का अधिकार मिला।
- लोक सेवा आयोग परीक्षाओं में उत्तर लिखने का विकल्प मिला।
- शिक्षा और साहित्य के विकास के लिए सरकारी सहायता का मार्ग खुला।
शिक्षा में संथाली
आज झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कई स्कूलों में संथाली भाषा माध्यम (Medium) या विषय (Subject) के रूप में पढ़ाई जाती है। सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय (दुमका, झारखंड) में संथाली भाषा और साहित्य में उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध है।संथाली भाषा और डिजिटल दुनिया
यूनिकोड में ओल चिकी लिपि के शामिल होने से संथाली भाषा ने डिजिटल दुनिया में भी अपनी जगह बनाई है:
- गूगल (Google) ने अपनी कई सेवाओं में संथाली भाषा का समर्थन जोड़ा है।
- विकिपीडिया पर संथाली भाषा का अपना संस्करण उपलब्ध है।
- स्मार्टफोन कीबोर्ड्स जैसे Gboard में ओल चिकी लिपि में टाइपिंग की सुविधा मिलती है।
- TypeHindi.in पर हमने भी English to Santhali Translator उपलब्ध कराया है, जिससे आप अंग्रेजी कीबोर्ड से सीधे संथाली (ओल चिकी) में टाइप कर सकते हैं।
निष्कर्ष
संथाली भाषा केवल एक बोलचाल का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हज़ारों वर्षों की आदिवासी संस्कृति, ज्ञान और पहचान का प्रतीक है। छोटा नागपुर पठार की भूमि से उपजी यह भाषा आज झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, असम, त्रिपुरा, बांग्लादेश और नेपाल तक फैली हुई है। पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा निर्मित ओल चिकी लिपि ने इस भाषा को एक लिखित पहचान दी और यूनिकोड ने इसे डिजिटल दुनिया में अमर कर दिया।
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